Wednesday, December 8, 2010

काहे रे बन खोजन जाई ॥




काहे रे बन खोजन जाई ॥ 
सरब निवासी सदा अलेपा तोही संगि समाई ॥१ ॥रहाउ ॥ 
पुहप मधि जिउ बासु बसतु है मुकर माहि जैसे छाई ॥ 
तैसे ही हरि बसे निरंतरि घट ही खोजहु भाई ॥१
बाहरि भीतरि एको जानहु इहु गुर गिआनु बताई ॥
जन नानक बिनु आपा चीनै मिटै न भ्रम की काई ॥२॥१॥(Gurbani - 684)

श्री गुरु तेग बहादुर जी महाराज कहते हैं,हे मानव ! तुझे प्रभु की खोज के लिए जंगलों में भटकने की क्या आवश्कता है | वह तो सभी में निवास करता हुआ भी सदा निर्लिप्त है | जिस तरह फूलों में सुगन्धि  एवं दर्पण में हमारी परछाई  छिपी है | उसी प्रकार  वह परमात्मा भी तुमारे संग,तुमारे ही अंतर में छिपा हुआ है | उस परमात्मा की खोज भी अपने अंतर  में ही करो | जो कुछ  भी वाहरी जगत में देखते हैं , जो आनंद हमें भोतिक जगत में प्राप्त होता है उसका वास्तविक रूप तो हमारे ही आंतरिक जगत में छिपा हुआ है | परन्तु यह हमें गुरु से ज्ञान प्राप्ति के पछ्चात ही पता चलता है | जब  तक हम स्वयं को नहीं पहचानते के हम कौन हैं ? हमारा वास्तविक स्वरूप  क्या है ? तब  तक हमारे संशयों  का नाश नहीं हो सकता | परन्तु यह सब  गुरु के बिना संभव नहीं |

गुर बिनु घोरु अंधारु गुरू बिनु समझ न आवै ॥ 
गुर बिनु सुरति न सिधि गुरू बिनु मुकति न पावै ॥(Gurbani - 1399)

श्री गुरु राम दास जी कहते हैं कि गुरु के  बिना अंधेरा है | गुरु के बिना न हमें सत्य की समझ ही आ सकती है और न ही चित को स्थिर कर किसी प्राप्ति को ही सिद्ध कर सकते हैं | न ही मुक्ति  की प्राप्ति हो सकती है| आज मनुष का जीवन घने अंधकार से ग्रसित है और गुरु की प्राप्ति के बिना क्या स्थिति होती है|

जिना सतिगुरु पुरखु न भेटिओ से भागहीण वसि काल ॥ 
ओइ फिरि फिरि जोनि भवाईअहि विचि विसटा करि विकराल ॥(Gurbani - 40)

जिस व्यक्ति ने सतगुरु पुर्ष की प्राप्ति नहीं की | वह भाग्यहीन  समय के बंधन में फंस जाते हैं | उन्हें  जन्म-मरण के भयानक कष्ट को भोगना पढ़ता है | आवागमन की विष्ट रुपी गंदगी के कष्टों को झेलना पढ़ता है| एस लिए  हमें भी चाहिए कि हम ऐसे  पूर्ण  संत की खोज करे,जो उसी समय हमारे घट में ईश्वर का दर्शन करवा दे तभी हमारा जीवन सार्थक होगा.|







4 comments:

  1. That's more
    Translate utna karo jitna kabita ka arth ho...

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  2. Pranaam!! Thank you!!
    My Nani used to sing the 1st one and i just knew the 1st line. I am glad you put this here and I googled.

    Sat Sri Akal

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